window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'G-MV9Z2YX5QS'); "सन 2023 संवत 2080 में मलमास कब है"?

“सन 2023 संवत 2080 में मलमास कब है”?

“मलमास 2023”

सनातन धर्म  में  ज्योतिषी गणना के अनुसार सन 2023 संवत 2080 में श्रावण मास में , मलमास पड़ने के कारण  श्रावण मास 60 दिनों का रहेगा। भगवान शिव को प्रिय श्रावण मास30 दिन का मलमास का 30 दिन का शुद्ध श्रावण मास रहेगा । शुद्ध श्रावण कृष्ण पक्ष  4 जुलाई से आरंभ होकर के 17 जुलाई तक रहेगा ।”18 जुलाई  2023 से 16 अगस्त 2023 तक सूर्य की संक्रांति ना होने के कारण  यह मास श्रावण मलमास,अधिक मास, रहेगा “। यह मास   जप  तप दान आदि धार्मिक कृत्यों के लिए बहुत ही शुभ व पुण्य दायक कहा गया है।

18 जुलाई 2023  से 1 अगस्त2023  तक  शुद्ध श्रावण शुक्ल पक्ष रहेगा ।

 

मलमास 2023

सन 2023 संवत 2080  पुरुषोत्तम मास, अधिक मास, मलमास कब है?

सनातन धर्म  में  ज्योतिषी गणना के अनुसार इस वर्ष श्रावण मास में मलमास पड़ने के कारण  श्रावण मास 60 दिनों का रहेगा। भगवान शिव को प्रिय श्रावण मास30 दिन का मलमास का 30 दिन का शुद्ध श्रावण मास रहेगा । 

यह मास   जप  तप दान आदि धार्मिक कृत्यों के लिए बहुत ही शुभ व पुण्य दायक कहा गया है।

 काल की गणना पांच प्रकार से की जाती है  वर्ष,अयन, ऋतु, मास व दिन।

 इसी प्रकार मास की गणना भी सावन सौर चांद्र और नाक्षत्र।

 इसमें  30  दिन के समय को सावन मास कहा जाता है ।

 सूर्य की संक्रांति से दूसरी संक्रांति तक की अवधि को सौर मास की संज्ञा है।

 नक्षत्र  मास में चंद्रमा के 27 नक्षत्र के भोग के समय को नक्षत्र मास जाते हैं।

 चांन्द्र मास दो पक्षों  योग से होता है, वह दो प्रकार का शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक तथा कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से पूर्णिमा तिथि तक । इसमें देश भेद  का विधान है भारतवर्ष के कुछ क्षेत्रों में कृष्ण पक्ष की व   कुछ क्षेत्रों में शुक्ल पक्ष से चांद्र मास की गणना की

  जाती है शास्त्रों में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही चांद्र वर्ष आरंभ माना जाता है।

“चान्द्रमास  द्वेधा शुक्लादिरमान्तः  कृष्णादि पुर्णिमान्तश्चेति “

मलमास जिस मास में दो संक्रांति हो  या  कोई भी संक्रांति ना हो तो वह मलमास कहा जाता है। 

 “यश्मिन मासे न संक्रांतिः  संक्रांतिः  द्वयमेव वा मलमासः  विज्ञयो मासः  स्यान्तु  त्रयोदशः”।

निर्णय सिंधु के अनुसार अधिक मास का नियम बताते हुए  वशिष्टऋषि  जी ने कहा कि 32 माह 16 दिन चार घड़ी व्यतीत होने पर एक अधिक मास होता है ।

इस प्रकार सौर मास में 365 दिन 15 घड़ी घटी होती है और चंद्र मास में 354   दिन22   घटी इस प्रकार   एक सौर  मास में और चांंद्र  मास में लगभग 11   दिन का अंतर होता है

 इस अंतर को अधिक मास के द्वारा कम किया जाता है। यह योग मलमास के द्वारा स्वतः ही प्राप्त हो जाता है।इस प्रकार एक संवत्सर में मलमास को जोड़ करके 13  मास हो जाते हैं ।

संवत 2080 सन 2023  में मलमास है शुद्ध श्रावण कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रविवार 16 जुलाई सन 2023 सूर्य कर्क राशि में प्रवेश कर रहे हैं इसके उपरांत सिंह राशि में सूर्य 16 अगस्त सन 2023 ईस्वी शुद्ध श्रावण शुक्ल प्रतिपदा बृहस्पतिवार को प्रवेश कर रहे  हैं अधिक श्रावण शुक्ल पक्ष एवं अधिक  श्रावण कृष्ण पक्ष में सूर्य  संक्रांति नहीं होने के कारण यह मास मलमास पुरुषोत्तम  असंक्रान्त है ।इस प्रकार 18 जुलाई  2023 से 16 अगस्त 2023 तक  श्रावण मलमास रहेगा स्रोत “श्री सिद्धिदात्री पंचांग” पंचांग कर्ता श्री विनोद श्री विनोद बिजल्वाण जी 

 मलमास नाम क्यों पड़ा?

पुराणों में अधिक मास की एक कथा आती है जिसमें सूर्य संक्रांति के 12 महीनों के अलग-अलग देवता स्वामी है किंतु अधिक मास स्वामी विहीन होने के कारण इसकी बड़ी निंदा होती है   इसको अत्यधिक  हीन दृष्टि से देखा जाता है कोई भी देवता इसके स्वामी होना स्वीकार नहीं करते हैं जिससे दुखी होकर के अधिक मास श्री हरि विष्णु के पास जाते हैं वहां पर भगवान विष्णु को अपने दुख की कहानी कहते हैं जिससे भक्तवत्सल भगवान उसे लेकर के गोकुल को आते हैं वहां पर श्री कृष्ण भगवान विराजमान थे तब करुणा सिंधु भगवान श्री कृष्ण ने मलमास की व्यथा को जान करके उस मास को वरदान दिया अब भविष्य मैं  तुम्हारा स्वामी हूं इससे मेरे सभी दिव्य गुण तुम्हें प्राप्त होंगे तुम पुरुषोत्तम मास के नाम से विख्यात होंगे । भगवान विष्णु को प्रिय होने के कारण यहां पुरुषोत्तम मास धार्मिक क्रियाकलापों के लिए अत्यधिक पुण्य वाला मास कहा गया है इस अवधि में  जप तप  दान पुण्य का अनंत गुना फल मिलता है  अधिक मास में भगवान विष्णु की उपासना करने का अपना विशेष महत्व है पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु की कथा सत्संग आदि का बहुत अधिक लाभ प्राप्त  होता है। 

मलमास का अर्थ

मलमास जिस मास में या दो संक्रांति हो  या  कोई भी संक्रांति ना हो तो वह  मास मलमास कहा जाता है। 

मलमास का संबंध सूर्य और चंद्र की गति से संबंधित है एक सौर  वर्ष में में 365 दिन 15 घड़ी घटी होती है और चांद्र वर्ष में में 354   दिन22   घटी इस प्रकार   एक सौर  मास में और चांंद्र  मास में लगभग 11   दिन का अंतर होता है

 इस अंतर को अधिक मास के द्वारा कम किया जाता है। यह योग मलमास के द्वारा स्वतः ही प्राप्त हो जाता है।इस प्रकार एक संवत्सर में मलमास को जोड़ करके 13  मास हो जाते हैं ।   यह 13 मास  ही मलमास कहा जाता है। 

2023 में मलमास कब लगेगा” ?

18 जुलाई  2023 से 16 अगस्त 2023 तक सूर्य की संक्रांति ना होने के कारण  यह मास श्रावण मलमास रहेगा ।

श्रावण शिवरात्रि कब है”?

सन 2023 में शुद्ध श्रावण मासकृष्ण पक्ष  4 जुलाई से आरंभ होकर के 17 जुलाई तक रहेगा  15 जुलाई शनिवार  चतुर्दशी तिथि रात्रि से  8 :34 शुरू होकर  16  जुलाई  रात्रि  १०:०९ तक रहेगी अर्थात 15 जुलाई शनिवार इसी दिन ही मासिक शिवरात्रि ,व् महादेव शंकर भगवान का जलाभिषेक  होगा।

मलमास में वर्जित कार्य

मलमास में  नित्य नैमित्तिक  कार्य को छोड़ कर के अन्य सभी शुभ कार्य जैसे नामकरण  मुंडन विवाह, गृहारम्भ, देव प्रतिष्ठा आदि शुभ कार्य वर्जित  रखने चाहिए।

18 जुलाई 2023  से 1 अगस्त2023  तक  शुद्ध श्रावण शुक्ल पक्ष रहेगा

Leave a comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.