window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'G-MV9Z2YX5QS'); "निर्जला एकादशी 2023 संवत 2080" - ARSH BHARAT %

NIRJALA EKADASHI

NIRJALA EKADASHI 1

निर्जला एकादशी 2023 संवत 2080  निर्जला एकादशी कब है श्री सिद्धिदात्री पंचांग के अनुसार इस वर्ष निर्जला एकादशी 31 मई को मनाई जाएगी।

निर्जला एकादशी का महत्व, हमारे सनातन धर्म में निर्जला एकादशी का बहुत अधिक महत्व है जिसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है शास्त्रों में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति पूरे वर्ष के 24 एकादशी का व्रत करने में असमर्थ है तो वह केवल एक भीमसेनी निर्जला एकादशी का व्रत करने से ही संपूर्ण एकादशीयों  का फल प्राप्त कर लेता है।

निर्जला एकादशी 24 एकादशीयों में श्रेष्ठ मानी जाती है क्योंकि यह व्रत करना सबसे कठिन होता  है भगवान विष्णु के निमित्त एकादशी का व्रत किया जाता है ।जेष्ठ  माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि निर्जला एकादशी के रूप में प्रसिद्ध है इस व्रत में बिना जल के  ही व्रत का पारायण किया जाता है।

अब आगे  जानते हैं इस  व्रत की पूरी विधि को।

एकादशी व्रत की पूजन विधि

एकादशी के दिन प्रातः काल किसी पवित्र नदी में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करके घर में या मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने फल पुष्प आदि से उनका पूजन करके व्रत का नियम का संकल्प लेना चाहिए ।

घर में भी शालिग्राम या भगवान विष्णु की प्रतिमा को सामने रखकर के यथाशक्ति उनका पूजन करें ,रितु काल अनुसार फल फूल आदि से विष्णु भगवान  की पूजा करें,पूजा में चावल को वर्जित रखना चाहिए चावल का प्रयोग ना तो पूजा में और ना ही खाने में करें।

निर्जला एकादशी व्रत कथा

स्कंद पुराण के अनुसार एक समय की बात है भीमसेन व्यास जी से बोले 

हे पितामह!  भ्राता  युधिष्ठिरमाता कुंती ,द्रोपदी, अर्जुन, नकुल और सहदेव आदि एकादशी के दिन व्रत करते हैं और मुझसे एकादशी के दिन अन्न  खाने को मना करते हैं मैं उनसे कहता हूं कि भाई में भक्ति पूर्वक भगवान की पूजा तो कर सकता हूं पर मैं एकादशी के दिन भूखा नहीं रह सकता |

 इस पर व्यास जी बोले हे भीमसेन ! यदि तुम्हें नरक बुरा और स्वर्ग अच्छा लगता हो तो प्रत्येक माह की दोनों एकादशी को अन्न न  खाया करो इस पर भीमसेन बोले हे पितामह मैं आपसे प्रथम कह चुका हूं कि मैं  दिन एक समय भी भोजन किये  बिना नहीं रह सकता फिर मेरे लिए पूरे दिन का उपवास करना कठिन है यदि मैं प्रयत्न करूं तो एक बार अवश्य व्रत कर सकता हूं तथा आप मुझे कोई एक ऐसा व्रत बताइए जिससे मुझे भी स्वर्ग की प्राप्ति हो। तब व्यास जी बोले ऋषियो और महर्षियों ने बहुत से शास्त्र बनाए हैं उन शास्त्रों में मनुष्य को दोनों पक्षों की एकादशी का व्रत  करने को कहा गया है, इससे उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होती हैराम व्यास जी के वचन के अनुसार भीमसेन नरक में जाने के कारण अत्यंत भयभीत हुए और  व्यास जी से बोले हे पितामह! अब मैं क्या करूं क्योंकि मुझसे व्रत नहीं हो सकता है अब आप मुझे कोई एक ही व्रत बताएं जिससे मेरी मुक्ति हो जाए तब श्री व्यास जी बोले हे भीमसेन!  जेष्ठ माह  के शुक्ल पक्ष की जो  एकादशी है उसको निर्जला व्रत करना चाहिए इस एकादशी के व्रत में स्नान और आचमन में जल वर्जित नहीं है किंतु आचमन में 3 माशे  से अधिक जल नहीं लेना चाहिए  इसी से शरीर की शुद्धि हो जाती है इस दिन भोजन नहीं करना चाहिए भोजन करने से व्रत भंग हो जाते हैं अतः संसार में सबसे श्रेष्ठ निर्जला एकादशी है। यत्न पूर्वक इस एकादशी का व्रत करना चाहिए।

 एकादशी के दिन ओम नमो भगवते वासुदेवाय इस महामंत्र का निरंतर उच्चारण करना चाहिए इस दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार जल कलश ,अन्न  वस्त्र आदि  अन्य उपयोगी वस्तुएं सुपात्र व्यक्तियों को दान करना चाहिए।

 व्यास जी के वचन को सुनकर  भीमसेन ने निर्जला एकादशी का व्रत किया। इसी कारण इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी यह पांडव एकादशी भी कहते हैं । इस एकादशी की व्रत कथा को सुनने का भी बहुत बड़ा महत्त्व है।

एकादशी व्रत के नियम

1.  एक एकादशी के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए झूठ   क्रोध आदि से बचना चाहिए।

2. एकादशी  का व्रत-उपवास करने वालों को दशमी के दिन मांस, लहसुन, प्याज, मसूर की दाल आदि निषेध वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए।

3. एकादशी के दिन प्रात: लकड़ी का दातुन न करें, नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और अंगुली से कंठ साफ कर लें, वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है। अत: स्वयं गिरा हुआ पत्ता लेकर सेवन करें। 

4  एकादशी के दिन भोजन का त्याग करके उपवास करना चाहिए कोशिश करनी चाहिए कि मन क्रम वचन से किसी को कष्ट न पहुंचे।

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